तुलसी पूजा विधि
दक्षिणा 2100 /- ज्योतिष तंत्र मंत्र यंत्र टोटका वास्तु कुंडली हस्त रेखा राशि रत्न,भूत प्रेत जिन जिन्नात बुरे गंदे सपने का आना, कोर्ट केस, लव मैरिज, डाइवोर्स, वशीकरण पितृ दोष कालसर्प दोष चंडाल दोष गृह क्लेश बिजनस विदेश यात्रा, अप्सरा परी साधना, अघोर साधनायें , समशान तांत्रिक साधनायें, सास बहु, सास ससुर, पति पत्नी, जेठ जेठानी, देवर देवरानी, नन्द नन्दोई, साला साली, सभी झगड़े विवाद का हल व वशीकरण कार्य किया जाता है
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कैसे करे तुलसी जी की पूजा
सबसे पहले माँ तुलसी जी को नमन करे | यह आपके घर की रक्षक है |
अब लोटे से जल चढ़ाये और मंत्र पढ़े : “महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी , आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।”
इसके बाद उन्हें सिंदूर और हल्दी चढ़ाये | यह उनका श्रंगार है |
अब तुलसी जी की पूजा के लिए घी का दीपक जलाये और शालिग्राम और वृंदा देवी को याद करके उनकी जय जयकार करे |
अब लोटे से जल चढ़ाये और मंत्र पढ़े : “महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी , आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोस्तुते।।”
इसके बाद उन्हें सिंदूर और हल्दी चढ़ाये | यह उनका श्रंगार है |
अब तुलसी जी की पूजा के लिए घी का दीपक जलाये और शालिग्राम और वृंदा देवी को याद करके उनकी जय जयकार करे |
अब धुप अगरबत्ती जलाये और माँ तुलसी की आरती करे ।
अब घर और परिवार के सदस्यों के लिए अच्छे भाग्य की विनती करे |
अब घर और परिवार के सदस्यों के लिए अच्छे भाग्य की विनती करे |
पूजन से जुड़े नियम
रविवार को तुलसी जी को नही तोड़े ना ही जल डाले |
रोज पूजा करे |
जब भी तुलसी जी के पत्ते तोड़े पहले ताली बजाये फिर क्षमा मांगे और फिर तोड़े |
कभी तुलसी जी के पौधे को सूखने ना दे |
जो भी भोग आप देवी देवताओ के निकालते है उनमे तुलसी दल जरुर रखे |
गणेश जी और शिव जी की पूजा में तुलसी काम में नही ले |
रोज पूजा करे |
जब भी तुलसी जी के पत्ते तोड़े पहले ताली बजाये फिर क्षमा मांगे और फिर तोड़े |
कभी तुलसी जी के पौधे को सूखने ना दे |
जो भी भोग आप देवी देवताओ के निकालते है उनमे तुलसी दल जरुर रखे |
गणेश जी और शिव जी की पूजा में तुलसी काम में नही ले |
तुलसी मंत्र एवंम तुलसी स्त्रोत्र
तुलसी को हिंदू धर्म में देवी के रूप में पूजा जाता है। पुराणों के अनुसार जिस घर के आंगन में तुलसी होती है वहां कभी अकाल मृत्यु या शोक नहीं होता है। माना जाता है कि तुलसी के प्रतिदिन दर्शन और पूजन करने से पाप नष्ट हो जाते हैं तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु जी की पूजा में तुलसी का सर्वाधिक प्रयोग होता है। तुलसी जी की पूजा में निम्न मंत्रों का प्रयोग कर जातक अधिक फल पा सकते हैं:
तुलसी पूजा के मंत्र (Tulsi Puja Mantra)
तुलसी जी को जल चढ़ाते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए-
महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।।
Tulsi ko jal chadhate samaye is mantra ka jaap krna chahiye-
Mahaprasada janani, sarva saubhagyavardhini
Aadhi vyadhi hara nityam, tulasi tvam namostute
Aadhi vyadhi hara nityam, tulasi tvam namostute
इस मंत्र द्वारा तुलसी जी का ध्यान करना चाहिए -
देवी त्वं निर्मिता पूर्वमर्चितासि मुनीश्वरैः
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
नमो नमस्ते तुलसी पापं हर हरिप्रिये।।
Is mantra dvara tulsi ji ka dhayan krna chahiye-
Devi tvam nirmita purvamarchitasi munisvaraih
namo namaste tulsi paapam har haripriye
namo namaste tulsi paapam har haripriye
तुलसी की पूजा करते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए-
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमन: प्रिया।।
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत्।
तुलसी भूर्महालक्ष्मी: पद्मिनी श्रीर्हरप्रिया।।
Tulsi ki Puja krte samaye is mantra ka uchharan krna chahiye-
Tulsi srirmahalaksmirvidyavidya yasasvini.
Dharmya dharmanana devi devidevamana: Priya
Labhate sutaram bhaktimante visnupadam labhet.
Tulsi bhurmahalaxmih Padmini sriharpriya
Dharmya dharmanana devi devidevamana: Priya
Labhate sutaram bhaktimante visnupadam labhet.
Tulsi bhurmahalaxmih Padmini sriharpriya
धन-संपदा, वैभव, सुख, समृद्धि की प्राप्ति के लिए तुलसी नामाष्टक मंत्र का जाप करना चाहिए-
वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।
एतभामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम।
य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलमेता।।
Dhan- smpada, vaibhav, sukh, samridhi ki parapati ke liye Tulsi Namaastak mantra ka jaap krna chahiye-
Vrinda vrindavani visvapujita visvapavani.
Puspasara nandaniya tulsi krishan jivani
Etabhamanstaka caiva strotam namartham sanyutama.
Yah Pathet tam cha sampujya saushramegha phalanlameta..
Puspasara nandaniya tulsi krishan jivani
Etabhamanstaka caiva strotam namartham sanyutama.
Yah Pathet tam cha sampujya saushramegha phalanlameta..
तुलसी के पत्ते तोड़ते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए-
ॐ सुभद्राय नमः
ॐ सुप्रभाय नमः
- मातस्तुलसि गोविन्द हृदयानन्द कारिणी
नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।
नारायणस्य पूजार्थं चिनोमि त्वां नमोस्तुते ।।
Tusli patte ko todate samaye is mantra ka jaap krna chahiye-
'Om subhadraya namah
Om suprabhaya namah
matastulsi govinda hridayananda karini
narayanasya pujartham chinomi tvam namostute
narayanasya pujartham chinomi tvam namostute
तुलसी जी की पूजा-साधना में तुलसी स्तोत्र का भी अहम स्थान है।
तुलसी स्तोत्रम
तुलसी जी को हिन्दू धर्म में अति पूजनीय माना जाता है। पद्मपुराण के अनुसार तुलसी का नाम मात्र उच्चारण करने से भगवान विष्णु बहुत प्रसन्न होते हैं। साथ ही मान्यता है कि जिस घर के आंगन में तुलसी होती हैं वहां कभी कोई कष्ट नहीं आता है।
तुलसी स्तोत्र पढ़ने का महत्व (Importance of Tulsi Strotram)
तुलसी जी की पूजा में कई मंत्रों के साथ तुलसी स्तोत्र का भी पाठ किया जाता है। पद्मपुराण के अनुसार द्वादशी की रात को जागरण करते हुए तुलसी स्तोत्र को पढ़ना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु जातक के सभी अपराध क्षमा कर देते हैं। तुलसी स्त्रोत को सुनने से भी समान पुण्य मिलता है। तुलसी स्त्रोत निम्न हैं-
तुलसी स्तोत्रम् (Tulsi Strotram in Hindi)
जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे।
यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥1॥
यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥1॥
नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे।
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥2॥
नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥2॥
तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा ।
कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥3॥
कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥3॥
नमामि शिरसा देवीं तुलसीं विलसत्तनुम् ।
यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्या मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥4॥
यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्या मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥4॥
तुलस्या रक्षितं सर्वं जगदेतच्चराचरम् ।
या विनिहन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥5॥
या विनिहन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥5॥
नमस्तुलस्यतितरां यस्यै बद्ध्वाजलिं कलौ ।
कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥6॥
कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥6॥
तुलस्या नापरं किञ्चिद् दैवतं जगतीतले ।
यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥7॥
यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥7॥
तुलस्याः पल्लवं विष्णोः शिरस्यारोपितं कलौ ।
आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥8॥
आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥8॥
तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः ।
अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥9॥
अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥9॥
नमस्तुलसि सर्वज्ञे पुरुषोत्तमवल्लभे ।
पाहि मां सर्वपापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥10॥
पाहि मां सर्वपापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥10॥
इति स्तोत्रं पुरा गीतं पुण्डरीकेण धीमता ।
विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥11॥
विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥11॥
तुलसी श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी ।
धर्म्या धर्नानना देवी देवीदेवमनःप्रिया ॥12॥
धर्म्या धर्नानना देवी देवीदेवमनःप्रिया ॥12॥
लक्ष्मीप्रियसखी देवी द्यौर्भूमिरचला चला ।
षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः ॥13॥
षोडशैतानि नामानि तुलस्याः कीर्तयन्नरः ॥13॥
लभते सुतरां भक्तिमन्ते विष्णुपदं लभेत् ।
तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया ॥14॥
तुलसी भूर्महालक्ष्मीः पद्मिनी श्रीर्हरिप्रिया ॥14॥
तुलसि श्रीसखि शुभे पापहारिणि पुण्यदे ।
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥15॥
नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये ॥15॥
इति श्रीपुण्डरीककृतं तुलसीस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
अस्तु....
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